जब भी इस देश को लहू की जरूरत होगी, म ै ं सबस े आग े रहूंगा" : इमरान प्रतापगढ़ी का राष्ट्रवाद और संघर्ष

 

"जब भी इस देश को लहू की जरूरत होगी, मैं सबसे आगे रहूंगा": इमरान प्रतापगढ़ी का राष्ट्रवाद और संघर्ष

भूमिका

भारतीय राजनीति और अदबी दुनिया (साहित्य) में इमरान प्रतापगढ़ी एक ऐसा नाम हैं, जो अपनी धारदार शायरी और बेबाक भाषणों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में संसद (राज्यसभा) में वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान उन्होंने एक ऐसा वाक्य कहा, जिसने सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक हलचल मचा दी: "मंत्री जी, जब भी इस देश को लहू की जरूरत होगी, इमरान आपसे दो कदम आगे खड़ा मिलेगा।"

यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि उस विचारधारा का प्रतिनिधित्व है जो भारतीय मुसलमानों के देशप्रेम और उनके ऐतिहासिक बलिदानों को रेखांकित करती है।

1. बयान का संदर्भ: वक्फ बिल और पहचान की जंग

इमरान प्रतापगढ़ी ने यह बात तब कही जब सदन में वक्फ की जमीनों को लेकर बहस चल रही थी। सत्ता पक्ष द्वारा वक्फ संपत्तियों पर उठाए जा रहे सवालों के जवाब में उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरह रेलवे और डिफेंस की जमीनें देश की हैं, वैसे ही वक्फ की जमीनें भी इसी देश की हैं क्योंकि इन्हें हमारे पुरखों ने दान किया है। उन्होंने कड़े शब्दों में पूछा कि इन जमीनों को "पराया" क्यों कहा जा रहा है?

2. इतिहास का हवाला और शहादत की विरासत

अपने संबोधन में इमरान ने उन क्रांतिकारियों को याद किया जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी। उन्होंने जिक्र किया:

अशफाक उल्ला खान: जो फैजाबाद जेल में हंसते-हंसते फांसी पर झूल गए।

मौलाना फजले हक खैराबादी: जिन्होंने काला पानी की सजा काटी।

वीर अब्दुल हमीद: जिन्होंने सरहद पर दुश्मनों के टैंकों के परखच्चे उड़ा दिए।

इन नामों के जरिए उन्होंने यह संदेश दिया कि इस देश की मिट्टी में मुसलमानों का खून भी उतना ही शामिल है जितना किसी और का।

3. "लहू की जरूरत" – वफादारी पर उठते सवालों का जवाब

अक्सर राजनीतिक विमर्श में एक खास वर्ग की देशभक्ति पर सवाल उठाए जाते हैं। इमरान प्रतापगढ़ी का यह बयान— "मैं सबसे आगे रहूंगा"—उसी नैरेटिव को चुनौती देता है। यह एक खुला ऐलान है कि जब भी राष्ट्र की सुरक्षा, अखंडता या प्रगति के लिए बलिदान की बात आएगी, तो वे और उनका समुदाय पीछे नहीं हटेगा।

4. शायरी से सियासत तक का सफर

इमरान प्रतापगढ़ी की ताकत उनकी भाषा है। एक मशहूर शायर होने के नाते वे जानते हैं कि शब्दों को दिल तक कैसे पहुँचाना है। उनकी शायरी में अक्सर यह झलकता है:

"जो सच और झूठ में दूरी है वो दूरी समझते हैं,

सियासी हाकिमों की हम भी मजबूरी समझते हैं..."

Comments

Popular posts from this blog

राहुल गांधी ने कहा मोदी जी किसी से नहीं डरते बस absteen फाइल और अडानी से डरते हैं

राघव चड्ढा ने दी निर्मला सीतारमण को करारा जवाब बोला आप मनमानी कर रही हैं

चंद्रशेखर आजाद पार्लियामेंट में अंबानी की और मोदी की बेज्जती