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Showing posts from March, 2026

जब भी इस देश को लहू की जरूरत होगी, म ै ं सबस े आग े रहूंगा" : इमरान प्रतापगढ़ी का राष्ट्रवाद और संघर्ष

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  "जब भी इस देश को लहू की जरूरत होगी, मैं सबसे आगे रहूंगा": इमरान प्रतापगढ़ी का राष्ट्रवाद और संघर्ष भूमिका भारतीय राजनीति और अदबी दुनिया (साहित्य) में इमरान प्रतापगढ़ी एक ऐसा नाम हैं, जो अपनी धारदार शायरी और बेबाक भाषणों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में संसद (राज्यसभा) में वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान उन्होंने एक ऐसा वाक्य कहा, जिसने सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक हलचल मचा दी: "मंत्री जी, जब भी इस देश को लहू की जरूरत होगी, इमरान आपसे दो कदम आगे खड़ा मिलेगा।" यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि उस विचारधारा का प्रतिनिधित्व है जो भारतीय मुसलमानों के देशप्रेम और उनके ऐतिहासिक बलिदानों को रेखांकित करती है। 1. बयान का संदर्भ: वक्फ बिल और पहचान की जंग इमरान प्रतापगढ़ी ने यह बात तब कही जब सदन में वक्फ की जमीनों को लेकर बहस चल रही थी। सत्ता पक्ष द्वारा वक्फ संपत्तियों पर उठाए जा रहे सवालों के जवाब में उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरह रेलवे और डिफेंस की जमीनें देश की हैं, वैसे ही वक्फ की जमीनें भी इसी देश की हैं क्योंकि इन्हें हमारे पुरखों ने दान किया है। उन्होंने कड़े शब्दों मे...

अरविंद केजरीवाल जेल से निकलते ही किया भाजपा नेताओं पर कड़ा प्हार जानिए पूरी बात।

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अरविंद केजरीवाल जेल से निकलते ही किया भाजपा नेताओं पर कड़ा प्हार जानिए पूरी बात।  Next video - Next video   https://viralnewssam.blogspot.com/2026/03/absteen.html Arvind Kejriwal’s Return: A Political Gamble or a Moral Stand? अरविंद केजरीवाल की वापसी: एक राजनीतिक जुआ या नैतिक  स्टैंड? 1. The Symbolic Release from Tihar English: The moment Arvind Kejriwal stepped out of Tihar Jail, the atmosphere in Delhi shifted. Drenched in rain and surrounded by thousands of supporters, his exit was choreographed to look like a hero’s return rather than a legal procedure. His immediate slogans of "Inquilab Zindabad" were a clear signal that he was not coming out to rest, but to fight. Hindi: जिस क्षण अरविंद केजरीवाल तिहाड़ जेल से बाहर निकले, दिल्ली का माहौल बदल गया। बारिश में भीगे हुए और हजारों समर्थकों से घिरे उनके बाहर आने के दृश्य को एक कानूनी प्रक्रिया के बजाय एक नायक की वापसी की तरह पेश किया गया। उनके " इंकलाब जिंदाबाद" के नारों ने स्पष्ट संकेत दिया कि वे आराम करने नहीं, बल्क...

राहुल गांधी ने कहा मोदी जी किसी से नहीं डरते बस absteen फाइल और अडानी से डरते हैं

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राहुल गांधी ने कहा मोदी जी किसी से नहीं डरते बस absteen फाइल और अडानी से डरते हैं राहुल गांधी का बड़ा कंट्रोवर्शियल भाषण दिया जिसमें उन्होंने मोदी जी को abssteen में होनेका दवा । सत्ता की जंग या इतिहास का फैसला? राहुल गांधी के 'फाइल' वाले बयान का सच भारत की राजनीति में शब्द अक्सर तलवार से ज़्यादा तेज़ चलते हैं। हाल ही में राहुल गांधी ने एक नए तेवर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम "भारत की फाइलें बेच रहे हैं" और उनका नाम इतिहास के पन्नो में उस तरह दर्ज नहीं होगा जैसा वो चाहते हैं। लेकिन इस भाषण के पीछे की हकीकत क्या है? क्या यह सिर्फ एक चुनावी जुमला है या इसमें कोई गहरा संकेत छुपा है? बयान के मायने: क्या है पूरा मामला? राहुल गांधी का इशारा देश के बड़े संसाधनों, जैसे एयरपोर्ट्स, पोर्ट्स और पीएसयू (PSUs) के निजीकरण (Privatization) की तरफ था। उनका तर्क है कि: संसाधनों का बंटवारा: वह आरोप लगा रहे हैं कि देश की मल्कियत (संपत्ति) को चुनिंदा कॉर्पोरेट्स को सौंपा जा रहा है। इतिहास की लड़ाई: गांधी का कहना है कि कोई कितनी भी कोशिश कर ले, इतिहास सिर्फ...